DIARY
वो हिस्सा जो सिर्फ़ तुम्हारे हिस्से आया !
मुझे अपने भीतर, कुछ खालीपन सा नहीं लगता , बस उसी प्राचीनता का आभास होता है जो पहले हुआ करता था । फर्क़ बस अब इतना है…
June 05, 2026
मुझे अपने भीतर, कुछ खालीपन सा नहीं लगता , बस उसी प्राचीनता का आभास होता है जो पहले हुआ करता था । फर्क़ बस अब इतना है ; कि वो 'प्राचीनता' जो मुझे पहले सामान्य लगती थी अब नीरस लगने लगी है! तुमसे मिलकर, जिस नवीनता का उद्गार हुआ था उसने मेरे व्यक्त…
Svaghoshit Lekhika
मुझे अपने भीतर, कुछ खालीपन सा नहीं लगता , बस उसी प्राचीनता का आभास होता है जो पहले हुआ करता था । फर्क़ बस अब इतना है…