मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर ।
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । माना तुमसे घृणा नहीं है, इस पल की बस कृपा यही है, और तुम्हारी बातों का भी, मुझको कोई गिला नहीं है, बस पुलकित हृदय न…
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा की गोद में समा जाया करती थी। कोई बेचैनी नहीं बस दिन में थोड़ा सो लिया था इसीलिए नींद नही आ रही है। कुछ टार्गेट्स अधूरे छूट गए आज भी, उसका भी थ…
Svaghoshit Lekhika
मुझे अपने भीतर, कुछ खालीपन सा नहीं लगता , बस उसी प्राचीनता का आभास होता है जो पहले हुआ करता था । फर्क़ बस अब इतना है ; कि वो 'प्राचीनता' जो मुझे पहले सामान्य लगती थी अब नीरस लगने लगी है! तुमसे मिलकर, जिस नवीनता का उद्गार हुआ था उसने मेरे व्यक्त…
Svaghoshit Lekhika
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…