DIARY
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर ।
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…
June 23, 2026
प्रिय संग्रिहका, बस अभी-अभी घर के लिए निकली हूँ प्रयाग से । पता नही तुमको बताया था या नही, पर हाँ अब आगे की जीवन यात्रा यहीं से होकर गुजरेगी । पिछली बार जब आयी थी तो तुमसे क्या-क्या बातें की थीं ये भी ध्यान नहीं, पिछली बार तो शायद पिछले महीने ही आयी थी। वैस…
Svaghoshit Lekhika
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…