DIARY
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर ।
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…
June 23, 2026
प्रिये संग्रहिका , बड़े दिनों बाद आयी ना ? बहुत ख़ुशी हो रही है। आ तो गयी हूँ पता नहीं जो बात शुरू करने जा रही हूँ वो ख़त्म कर भी पाऊँ या नहीं !! वैसे भी आजकल जो भी शुरू करती हूँ उसे ख़त्म नहीं कर पाती। बीच में ही छोड़ देती हूँ। कुछ चीजों का बीच में छोड़ दिया जा…
Svaghoshit Lekhika
मुग्ध नहीं होता मन अब, प्रिय तुम्हारी बातों पर । संयम मन ने साध लिया है, चंचल से जज्बातों पर । मुग्ध नहीं होता मन अब, प…