प्रिये संग्रहिका ,
ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा की गोद में समा जाया करती थी। कोई बेचैनी नहीं बस दिन में थोड़ा सो लिया था इसीलिए नींद नही आ रही है। कुछ टार्गेट्स अधूरे छूट गए आज भी, उसका भी थोड़ा मलाल सा है। कुछ टार्गेट्स जो शुरू करने में आलस आती है या डर लगता है उसको अगले दिन शुरू करुँगी बोलकर टाल देती हूँ फिर जब असल में किसी दिन मन बना ही लेती हूँ उस काम को पूरा करने का या किसी काम की शुरुवात करने की तो कुछ न कुछ परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि वो काम शुरू ही नहीं हो पाता है।
मतलब नियति आड़े आ जाती है। या शायद ईश्वर। पता नहीं जो भी हो !
ख़ैर तुम बताओ कैसी हो ?
वैसे एक बात बताऊं मैं ना आज अपनी एक फीमेल कलीग से डिसकस कर रही थी कि कैसे हमारा लड़की होना हमारे काम में कई बार बाधक बनता है। जैसे हम दोनों ही एक ही प्रोफेशन में इनवॉल्वड हैं। लेखन में। और उसी से सम्बंधित इवेंट्स वगेरा आयोजित करते रहते हैं। और उसी सिलसिले में कई बार लोगो से इंटरेक्शन भी होता है काम को लेकर लेकिन काम को लेकर इंटरैक्शन का उद्देश्य तो सिर्फ हमारा ही होता है सामने वाला का नही यदि वो पुरुष है तो ! क्योंकि उसका ध्यान तो कहीं और ही रहता है। अधिकांशतः पुरुषो का यही हाल रहता है। मुझे समझ नहीं आता वो ऐसा अपनी प्रविर्ती के चलते करते हैं या वो हमें ये दर्शाना चाहते हैं कि औरतों की उनकी नज़र में क्या इज़्ज़त है या वो औरतों को किस तरह देखते है। और हमसे भी ऐसा बर्ताव करके शायद हमे ये दर्शाना चाहते हैं कि औरत होने के नाते हमारी हैसियत क्या होनी चाहिए पुरुषों के आगे ! सच बताऊं तो बड़ा ख़राब सा लगता है मतलब मन बड़ा अजीब सा हो जाता है ऐसे लोगो से बात करने के बाद।
मेरी और भी पुरुषो से बात हुई है। कुछ पुरुष अपनी मर्यादा में रहकर बातचीत करते हैं सिर्फ काम से काम रखते हैं उनसे कोई दिक्कत नहीं होती हमें। बल्कि हम तो ऐसे लोगों के आभारी हैं कि उनकी वजह से ये दुनिया कम से कम औरतों के रहने लायक बानी हुई है थोड़ी बहुत ही।
पता है दो तरह के लोग होतें हैं एक वो जो मुँह पर ही आपसे घृणा करते हैं और एक वो जो मुँह पर तो अच्छा अच्छा बोलेंगे और पीठ पीछे छुरी भोंक देंगे। पर अब एक और नए प्रजाति का मनुष्य भी आ गया है वो मुँह पर ही मीठा बोलेगा और आपकी आँखों के सामने ही धीरे धीरे आपका गला रेतेगा और आपको पता भी नहीं चलेगा। आप कुछ कह भी नहीं पाएंगे सब कुछ सामने घटता हुआ देख कर भी। ये सबसे खतरनाक प्रजाति होती है। इससे बचकर रहना होता है।
और मैं बच नहीं पा रही हूँ !!!!
शुभरात्रि , ख्याल रखना अपना।

