DIARY
नए प्रजाति का मनुष्य !
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…
June 07, 2026
कैसी हो सखी ? सबसे पहले तो कान पकड़ कर माफ़ी चाहूँगी ! हाँ , पता है महीनों बीत गए आये। पर क्या करूँ ? अब समय की बड़ी किल्लत है ! हाँ , बहुत व्यस्त रहने लगी हूँ। तुमसे बात करने के लिए केवल समय नहीं इत्मीनान भी साथ लाना पड़ता है और मैं समय ले भी आऊँ तो अब इत्मीनान …
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…