DIARY
नए प्रजाति का मनुष्य !
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…
June 07, 2026
एक खत तुम्हारे नाम तुम्हें देखकर अब अच्छा नहीं लगता! तुम्हें देखने से अब शीतल हवाएँ नहीं चलतीं, तुम्हें देखने से पेट में तितलियाँ महसूस नहीं होतीं, तुम्हें देखने से आँखों में नूर नहीं आता, तुम्हें देखने से तन में बिजली नहीं कौंधती । और सबसे ज़रूरी, तुम…
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…