DIARY
नए प्रजाति का मनुष्य !
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…
June 07, 2026
मन के बहकावे में ना आ, मन राह भुलाए भ्रम में डाले। तू इस मन का दास ना बन, इस मन को अपना दास बनाले। हमारे बड़े-बुजूर्गों ने हमें अक्सर यह बात समझाई है कि कुछ काम ऐसे होते हैं जो केवल हमारे मन के काबू में न होने के कारण बिगड़ जाते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि जिस…
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , ऐसे दिन भी आ गए हैं कि घंटो आँखें बंद करके लेटे रहने के बावजूद नींद नहीं आती। कहाँ लेटते ही निद्रा क…