कैसी हो ?
जवाब में " ठीक हूँ " कह देना तुम भी। जैसे सब कहते हैं। सबको यही कहना पड़ता है। क्योंकि यहाँ किसी को समय नहीं है किसी का दुःख सुनने की। अब तो उम्र ही ऐसी आ गयी है किसी को दोष दिया भी नहीं जा सकता है। सब अपने में लगे हुए हैं समय की मांग वही है। अगर नहीं लगे तो कल को कोई पूछ पहुँच नहीं होगी। जो लोग आज शिकायतें करते हैं कि समय नहीं है तुम्हारे पास वही सबसे पहले किनारा करके निकल जायेंगे अगर जीवन में सफलता हाथ नहीं आयी तो। दोस्त , बॉयफ्रेंड , रिश्तेदार यहाँ तक की मेरी कलम भी कहती है कि "कहीं दिखाई नहीं देती हो आजकल !!" हाँ नहीं दिखाई देती हूँ ! अभी नहीं दिखाई दूंगी तो कल को नजर आने लायक रहूंगी।
कुछ दोस्त ऐसे भी हैं जो कहते हैं बाकी सभी चीजों के लिए समय है तुम्हारे पास मुझसे बात करने के लिए नहीं है ! तो मैं थोड़ा रुक कर फिर पूछती हूँ "बाकी सब" से क्या तात्पर्य है तुम्हारा ? तो पता चलता है कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हूँ !! people who are actually following me on social media know how much am i active these days ! seeing just a single post that too once in a blue moon, and coming and saying you are active on social media does not literally make sense at all !!
मतलब सिर्फ एक काम जिससे थोड़ी देर के लिए ही सही मैं उन चीजों से थोड़ा खुद को दूर करके जिसमे सुबह शाम दिन रात लगी हुई हूँ अगर कर लूँ तो उसमे भी इतनी बड़ी समस्या हो जा रही। ये जानते हुए भी that how much i loved doing all these things !!
At this particular point of time i literally can not explain people the things that they are not going to understand anyways !! The only thing i have in my mind is that today if i do not give time to myself tomorrow nobody gonna give a single second of their life to me !and this somewhere right ! I know people need friends, people need people, to survive but the one who is staying with me at this time are my people. I do not know how longer they gonna stay , but i won't forget them . Actually i will not forget anyone . the one who are angry on me for not giving time , i completely understand them . पर मैं अभी समय नहीं दे सकती ! बहुत कुछ है करने को ! जो मुझसे अभी नहीं हो पा रहा है पता नहीं जो करना चाहती हूँ वो हो पायेगा भी या नहीं पर मैं इस guilt के साथ lifelong नहीं जीना चाहती कि मैंने अपना 100 % भी नहीं दिया !
समय ! सारा खेल समय का ही है !
आज एक फोटो अचानक सामने आयी गूगल फोटोज की बदौलत ! अम्मा की, अपने पाँचो बेटों के साथ , एकदम सुखी , प्रसन्न, चेहरे पर गर्व का भाव लिए बीच में बैठी थीं ! अम्मा की मुस्कान सबसे प्यारी लगती थी मुझे। और सिर्फ मुझे नहीं घर में सबको ही पसंद थी उनकी वो हल्की सी मुस्कराहट जो कभी ख़ुशी का , कभी गर्व का, कभी चालाकी का और कभी कभी शर्म का भाव लिए चेहरे पर उभरती थी।
समय सारे घाव भर देता है ! मैं बस अब इसी घाव के भरने के इंतज़ार में हूँ !
विदा दो अब ! शुभरात्रि !
