DIARY
अपराधबोध !!
प्रिये संग्रहिका , रात के करेक्ट एक बज रहे हैं। आज इतने दिनों बाद अचानक आने का कारण बेशक तुम नहीं पूछोगी। क्योंकि तुम …
February 25, 2026
एक खत तुम्हारे नाम तुम्हें देखकर अब अच्छा नहीं लगता! तुम्हें देखने से अब शीतल हवाएँ नहीं चलतीं, तुम्हें देखने से पेट में तितलियाँ महसूस नहीं होतीं, तुम्हें देखने से आँखों में नूर नहीं आता, तुम्हें देखने से तन में बिजली नहीं कौंधती । और सबसे ज़रूरी, तुम…
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , रात के करेक्ट एक बज रहे हैं। आज इतने दिनों बाद अचानक आने का कारण बेशक तुम नहीं पूछोगी। क्योंकि तुम …