DIARY
मुझे अब तुम अच्छे नहीं लगते !!
एक खत तुम्हारे नाम तुम्हें देखकर अब अच्छा नहीं लगता! तुम्हें देखने से अब शीतल हवाएँ नहीं चलतीं, तुम्हें देखने से प…
January 23, 2026
कैसी हो सखी ? सबसे पहले तो कान पकड़ कर माफ़ी चाहूँगी ! हाँ , पता है महीनों बीत गए आये। पर क्या करूँ ? अब समय की बड़ी किल्लत है ! हाँ , बहुत व्यस्त रहने लगी हूँ। तुमसे बात करने के लिए केवल समय नहीं इत्मीनान भी साथ लाना पड़ता है और मैं समय ले भी आऊँ तो अब इत्मीनान …
Svaghoshit Lekhika
एक खत तुम्हारे नाम तुम्हें देखकर अब अच्छा नहीं लगता! तुम्हें देखने से अब शीतल हवाएँ नहीं चलतीं, तुम्हें देखने से प…