DIARY
अपराधबोध !!
प्रिये संग्रहिका , रात के करेक्ट एक बज रहे हैं। आज इतने दिनों बाद अचानक आने का कारण बेशक तुम नहीं पूछोगी। क्योंकि तुम …
February 25, 2026
मन के बहकावे में ना आ, मन राह भुलाए भ्रम में डाले। तू इस मन का दास ना बन, इस मन को अपना दास बनाले। हमारे बड़े-बुजूर्गों ने हमें अक्सर यह बात समझाई है कि कुछ काम ऐसे होते हैं जो केवल हमारे मन के काबू में न होने के कारण बिगड़ जाते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि जिस…
Svaghoshit Lekhika
प्रिये संग्रहिका , रात के करेक्ट एक बज रहे हैं। आज इतने दिनों बाद अचानक आने का कारण बेशक तुम नहीं पूछोगी। क्योंकि तुम …